लोक सभा ने 5 मई 2016 को दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता विधेयक 2016 पारित कर दिया. इसका उद्देश्य देश में कारोबार के माहौल को अच्छा बनाना और निवेश को प्रोत्साहित करना है ताकि उच्च आर्थिक वृद्धि दर हासिल की जा सके.पारित किये गए विधेयक में भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में बनी संयुक्त संसदीय समिति की शिफरिशो को शामिल किया गया है. समिति ने 28 अप्रैल 2016 को केंद्र सरकार को रिपोर्ट सौपी थी.

विधेयक के मुख्य प्रवधान:

• इसमें दिवाला संबंधी मामलों का समयबद्ध तरीके से समाधान निकालने का प्रावधान किया गया है.

• प्रस्तावित विधेयक के मुताबिक कारपोरेट क्षेत्र और व्यक्तियों से सम्बंधित दिवाला मामलों का समाधान 180 दिनों में होगा.

• इस संहिता का उद्देश्य कारपोरेट व्यक्तियों और फर्मों तथा व्यक्तियों के दिवाला समाधान, परिसमापण और शोधन क्षमता के लिए न्यायनिर्णय प्राधिकरणों के रूप में करने के लिए है.

• विधेयक में भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड स्थापित करने का प्रावधान किया गया है ताकि पेशेवरों, एजंसियों और सूचना सेवाओं के क्षेत्र में कंपनियों, गठजोड़ फर्म और व्यक्तियों के दिवालिया होने के विषयों का नियमन किया जा सके.

• राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) कंपनियों के लिए दिवाला संकल्प पर निर्णय करेगा.

• ऋण वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी) व्यक्तियों के लिए दिवाला संकल्प पर निर्णय करेगा.

• नये विधान से आदतन चूककर्ताओं के विदेशों में स्थित सम्पत्ति को जब्त किया जा सकेगा. इसके लिए वें सीमापार संधि (क्रास बोर्डर ट्रिटी) करेगे.

• इसके माध्यम से कामगारों के अधिकारों की सुरक्षा करने के साथ दिवाला समाधान से संबंधित विधियों का समयबद्ध रीति से ऐसे व्यक्तियों की आस्तियों के अधिकतम मूल्य के लिए समेकन और संशोधन करने का प्रावधान है.

• रूग्ण उद्योगों के कर्मचारियों के हितों को सुरक्षित करने के लिए इसमें विशेष पहल की गई है.

 

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