विश्व भर में 1 मार्च 2016 को शून्य भेदभाव दिवस मनाया गया. इस दिन का विषय था – स्टैंड आउट.

शून्य भेदभाव दिवस सभी प्रकार के भेदभावों से उपर उठकर और सभी लोगों को एक गरिमामयी उत्पादक जीवन जीने के अधिकार देने का अवसर प्रदान करता  है. इसका आयोजन समाज में निष्पक्षता लाने, विविधता को अपनाने  तथा प्रतिभा एवं कौशल को महत्व देने के लिए किया जाता है.

इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र की एचआईवी/एड्स पर कार्यरत एजेंसी ने विश्व के सभी लोगों से विविधताओं का सम्मान करने एवं अपनी कुशलता से एक-दूसरे का सहयोग करने के लिए आग्रह किया.

इस अवसर पर एजेंसी ने यह भी कहा कि विश्व में लैंगिक, राष्ट्रीयता, आयु, धर्म, रंग आदि को लेकर विविधताएं मौजूद हैं लेकिन हमें इनका सम्मान करना चाहिए. विश्व के प्रत्येक 10 में से चार देशों में लड़के एवं लड़कियां समान रूप से स्कूल शिक्षा प्राप्त करते हैं जबकि 75 देशों में समलैंगिक सबंधों को अपराध की श्रेणी में रखा गया है.

इस दिन का आरंभ विश्व एड्स दिवस पर दिसंबर 2013 में यूएनएड्स द्वारा किया गया था. इसे प्रत्येक वर्ष 1 मार्च 2014 से मनाया जा रहा है. तितली को इसके प्रतीक के रूप में चुना गया है.

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