विश्व भर में 1 मार्च 2016 को शून्य भेदभाव दिवस मनाया गया. इस दिन का विषय था – स्टैंड आउट.

शून्य भेदभाव दिवस सभी प्रकार के भेदभावों से उपर उठकर और सभी लोगों को एक गरिमामयी उत्पादक जीवन जीने के अधिकार देने का अवसर प्रदान करता  है. इसका आयोजन समाज में निष्पक्षता लाने, विविधता को अपनाने  तथा प्रतिभा एवं कौशल को महत्व देने के लिए किया जाता है.

इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र की एचआईवी/एड्स पर कार्यरत एजेंसी ने विश्व के सभी लोगों से विविधताओं का सम्मान करने एवं अपनी कुशलता से एक-दूसरे का सहयोग करने के लिए आग्रह किया.

इस अवसर पर एजेंसी ने यह भी कहा कि विश्व में लैंगिक, राष्ट्रीयता, आयु, धर्म, रंग आदि को लेकर विविधताएं मौजूद हैं लेकिन हमें इनका सम्मान करना चाहिए. विश्व के प्रत्येक 10 में से चार देशों में लड़के एवं लड़कियां समान रूप से स्कूल शिक्षा प्राप्त करते हैं जबकि 75 देशों में समलैंगिक सबंधों को अपराध की श्रेणी में रखा गया है.

इस दिन का आरंभ विश्व एड्स दिवस पर दिसंबर 2013 में यूएनएड्स द्वारा किया गया था. इसे प्रत्येक वर्ष 1 मार्च 2014 से मनाया जा रहा है. तितली को इसके प्रतीक के रूप में चुना गया है.

anand-mahindra-conferred-with-highest-french-award

 anand-mahindra-conferred-with-highest-french-awardमहिंद्रा एंड महिंद्रा समूह के प्रबंध निदेशक और अध्यक्ष आनंद जी महिंद्रा 5 मार्च 2016 को चफ्रांस के ‘नाइट ऑफ़ द लीजन ऑफ़ ऑनर’ से सम्मानित किए गए. भारत में फ्रांस के राजदूत फ़्राँस्वा रिचीअर के नई दिल्ली निवास पर उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया.

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धियों और महिंद्रा समूह के कुशल संचालन के लिए आनंद महिंद्रा को उच्चतम फ्रांसीसी नागरिक गौरव सम्मान से नवाज़ा गया.

नेशनल आर्डर ऑफ़ लीजन ऑनर के बारे में-  

• द नेशनल आर्डर ऑफ़ द लीजन ऑफ़ ऑनर (आर्डर नेशनल डी ला लीजन  डी’होंनयूर) एक फ्रांसीसी सम्मान है, यह 19 मई 1802 को नेपोलियन बोनापार्ट द्वारा स्थापित किया

• फ्रांस में यह सम्मान सर्वोच्च उपाधि है और आरोही क्रम में पांच डिग्री में बांटा गया है. जिनमे शेवेलियर (नाइट), ऑफिसर (अधिकारी), कोम्मन्देउर (कमांडर), ग्रैंड ऑफिसर (ग्रैंड अधिकारी) और ग्रैंड’क्रोइक्स (ग्रैंड क्रॉस)हैं.

• सम्मान का उद्देश्य ‘ऑनर एंड फादरलैंड’ है.

pa sangma

पूर्व लोकसभा स्पीकर पूर्नो अजितोक संगमा का 4 मार्च 2016 को निधन हो गया. वे 68 वर्ष के थे.  उनके परिवार में उनकी बेटी अगाथा संगमा है जो राज्य मंत्री रह चुकी हैं. उनके पुत्र कोनार्ड संगमा भी मेघालय विधानसभा में विरोधी दल के नेता रह चुके हैं.

pa sangma

•    पी ए संगमा का जन्म 1 सितंबर 1947 को मेघालय में हुआ.

•    उन्होंने शिलांग से स्नातक और फिर असम के डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की उपाधि ली. इसके बाद उन्होंने एलएबी भी की.

•    संगमा 1996 से 1998 के दौरान लोकसभा के अध्यक्ष रहे एवं 1988 से 1990 तक मेघालय के मुख्यमंत्री भी रहे.

•    संगमा ने 2 जनवरी 2013 में नेशनल पीपुल्स पार्टी की स्थापना की थी. उनकी पार्टी मेघालय विधानसभा चुनाव 2013 में दो सीटें जीतने में कामयाब रही.

•    वे नौ बार लोक सभा सदस्य रहे – छ्ठी, सातवीं, आठवीं, दसवीं, ग्यारहवीं, बारहवीं, तेरहवीं, चौदहवीं एवं पद्रहवीं लोक सभा के सदस्य रहे.

•    निधन से पूर्व वे मेघालय की पश्चिमी गारो पर्वतमाला में स्थित तुरा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधत्व कर रहे थे.

•    उन्होंने वर्ष 2012 में राष्ट्रपति चुनाव में प्रणब मुखर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ा था.

राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस 4 मार्च 2016 को पूरे देश में मनाया गया. यह दिवस प्रतिवर्ष कार्यस्थलों पर सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है. इस दिन से एक सप्ताह तक चलने वाला सुरक्षा अभियान भी शुरू हो जाता है.

सुरक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संबंधी सहायता सेवा के साथ उनको लाभ पहुँचाने के द्वारा उनके आर्थिक नुकसान और विभिन्न मानव समस्या सहित जीवन के घाटे को कम करने और बचाने के लिये वार्षिक आधार पर ये एक राष्ट्रीय आंदोलन है.

भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद एक स्वशासित संस्था (लोक सेवा के लिये गैर लाभांस और गैर सरकारी संस्था) है जो 8000 सदस्यों के साथ मुम्बई में सोसाइटी एक्ट के तहत 4 मार्च 1966 में स्थापित हुआ था.

इस अभियान के द्वारा जरुरत पर आधारित क्रियाकलाप, कानूनी माँग के साथ स्व-अनुपालन और पेशेवर एसएचई (सुरक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण) गतिविधियों को कार्यस्थल पर कर्मचारियों के बीच बढ़ावा दिया जाता है.

manoj kumar

फिल्म अभिनेता और निर्देशक मनोज कुमार को वर्ष 2015 के दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किये जाने की घोषणा 4 मार्च 2016 को की गई.

इस वर्ष की पांच सदस्यीय जूरी में शामिल लता मंगेशकर, आशा भोसले, सलीम खान, नितिन मुकेश और अनूप जलोटा ने सर्वसम्मति से मनोज कुमार को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार देने की सिफारिश की.manoj kumarदादा साहेब फाल्के पुरस्कार पाने वाले मनोज कुमार 47वें अभिनेता हैं. वर्ष 2014 में यह सम्मान शशि कपूर को दिया गया.

मनोज कुमार के बारे में

•    मनोज कुमार का जन्म जुलाई 1937 में अविभाजित भारत के एबटाबाद में हुआ था. दिल्ली के हिन्दू कॉलेज से स्नातक होने के बाद उन्होंने फिल्मों में प्रवेश करने का निर्णय लिया.

•    मनोज कुमार एक जाने-माने कलाकार और निर्देशक रहे हैं. उनकी फिल्म ‘हरियाली और रास्ता’, ‘वो कौन थी’,’हिमालय की गोद में’, ‘दो बदन’, ‘उपकार’, ‘पत्थमर के सनम’, ‘नील कमल’, ‘पूरब और पश्चिम’, ‘रोटी कपड़ा और मकान’ और ‘क्रांति’ जैसी फिल्मों के लिए याद किया जाता है.

•    ‘उपकार’ फिल्म के लिए मनोज कुमार को राष्ट्री्य फिल्म पुरस्कार प्रदान किया गया था. भारत सरकार ने 1992 में उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया था.

•    उन्होंने देशभक्ति की विषय वस्तु वाली फिल्मों में काम करने और निर्देशित करने के लिए भी प्रसिद्धि प्राप्त की.

•    वर्ष 1960 में उन्हें  ‘कांच की गुडि़या’ नामक फिल्म में पहली बार शीर्ष भूमिका निभाने का मौका मिला.

•    उनकी ‘दो बदन’ नामक फिल्म को राज खोसला के निर्देशन, मनोज कुमार के अभिनय और रवि के संगीत तथा शकील बंदायूनी के अमर गीतों के लिए याद किया जाता है.

•    1965 में शहीद फिल्म से उनकी देशभक्ति के हीरो की छवि बनी.

•    1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने उन्हें जय जवान, जय किसान नामक नारे पर आधारित फिल्मे बनाने के लिए कहा. इस पर उन्होंने

उपकार’ नाम से यादगार फिल्म  बनाई.

•    इससे पहले दिलीप कुमार, शशि कपूर, ए.गोपाल कृष्णन, सोमित्र चटर्जी, सत्यजीत रे, मृणाल सेन जैसी हस्तियों को भी दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से नवाजा जा चुका

दादा साहेब फाल्के पुरस्कार

इस पुरस्कार का प्रारंम्भ दादा साहेब फाल्के के जन्म शताब्दी वर्ष 1969 से हुआ. दादा साहेब फाल्के पुरस्कार सूचना प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए दिया जाने वाला एक वार्षिक पुरस्कार है.

सरकार द्वारा यह पुरस्कार इस उद्देश्य के लिए गठित प्रख्यात हस्तियों की समिति की सिफारिशों के आधार पर दिया जाता है. पुरस्कार के तहत एक स्वर्ण कमल, 10 लाख रुपये का नकद राशि और एक शॉल प्रदान किया जाता है. वर्ष 2012 का दादा साहेब फाल्के पुरस्कार अभिनेता प्राण व वर्ष 2013 का दादा साहेब फाल्के पुरस्कार गीतकार गुलजार को दिया गया.

राष्ट्रीय फिल्म अभिलेखागार के संस्थापक एवं पूर्व फिल्म निर्देशक पी के नायर का 4 मार्च 2016 को लंबी बीमारी के चलते पुणे में निधन हो गया. वे 82 वर्ष के थे. नायर के लिए कहा जाता है कि यदि वे न होते तो भारतीय सिनेमा का 100 साल का इतिहास भी न होता. उनका जन्म 6 अप्रैल 1933 को केरल में हुआ, लेकिन उनका ज्यादातर समय मुंबई और पुणे में बीता.उन्होंने एक भी फिल्म का निर्माण नहीं किया लेकिन कई फिल्मों में ऋषिकेश मुखर्जी के साथ बतौर अस्सिटेंट   काम किया.

•    नायर ने अपनी पहली फिल्म त्रिवेंद्रम में रेत के ढेर पर बैठ कर देखी और यहीं से फिल्मों के टिकट को एकत्रित करने का काम शुरू किया.

•    पुरानी फिल्मों को संजोने के लिए 1964 में पी.के नायर ने पुणे में पहला फिल्म आर्काइव इंस्टिट्यूट शुरू किया.

•    नायर ने उन फिल्मों का संग्रह इंस्टिट्यूट में किया जो नष्ट होने की कगार पर थीं.

•    भारत में लगभग 1700  साइलेंट फिल्में बनीं. लेकिन उनमें से केवल 9 फिल्मों के रील ही सुरक्षित हो सकी.

•    नायर साहब ने भारत की पहली बोलती फिल्म से लेकर दादा साहेब फाल्के की अधिकतर फिल्मों को रील में संरक्षित किया.

•    उनके संग्रह में अभिनेता अशोक कुमार ‘अछूत कन्या’ से लेकर अब तक की सभी फिल्में हैं.

•    पी के नायर के एक शिष्य शिवेंद्र सिंह डूंगरपुर ने उनके जीवन पर ‘सेलोलोइड मैन’ नाम की एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाई.

•    इस फिल्म को दो राष्ट्रीय और कई फिल्मोत्सव में अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार   मिले.