यह समझौते राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की पापुआ न्यू गिनी में दो दिवसीय (28 एवं 29 अप्रैल 2016) यात्रा के दौरान किये गये. मुखर्जी इस देश की अधिकारिक यात्रा पर जाने वाले भारत के पहले राष्ट्रपति हैं•    

  • स्वास्थ्य और चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में समझौता ज्ञापन: यह समझौता भारत के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और पापुआ न्यू गिनी के स्वास्थ्य मंत्रालय और एचआईवी / एड्स मंत्रालय के बीच किया गया.
  • 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर क्रेडिट लाइन हेतु समझौता ज्ञापन: इस समझौते पर पापुआ न्यू गिनी में बुनियादी ढांचे के विकास हेतु भारतीय आयात-निर्यात बैंक एवं पापुआ न्यू गिनी सरकार द्वारा हस्ताक्षर किए गये.
  • कृषि अनुसंधान पर समझौता ज्ञापन: इस पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली एवं पीएनजी यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी, पापुआ न्यू गिनी के मध्य हस्ताक्षर किये गये.
  • भारत-पापुआ न्यू गिनी आईटी सेंटर स्थापना हेतु समझौता.

प्रसिद्ध भारतीय निशानेबाज अभिनव बिंद्रा को 29 अप्रैल 2016 को रियो ओलंपिक के लिये भारतीय दल का सदभावना दूत बनाया गया. उन्हें सलमान खान सहित इस पद हेतु चुना गया. ओलंपिक की व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के पहले और एकमात्र खिलाड़ी अभिनव बिंद्रा ने को भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन (आईओए) से आमंत्रण मिलने के पश्चात् उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया. चयन के बाद बिंद्रा कहा कि वह ओलंपिक जाने वाले सभी खिलाड़ियों को लिखकर प्रेरित करेंगे. उन्होंने कहा, “मैने पूरी जिंदगी ओलंपिक खेलों के लिये जिया है और भारत में ओलंपिक आंदोलन की बेहतरी के लिये अपनी ओर से सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया है और करता रहूंगा.”

भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) ने 3 मई 2016 को मध्य प्रदेश में 600 मेगावाट की कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्र परियोजना का शुभारम्भ किया. यह परियोजना ‘‘मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में 600 मेगावाट क्षमता की झाबुआ तापीय विद्युत परियोजना चालू की गई. इस परियोजना को झाबुआ पावर लिमिटेड (जेपीएल) ने विकसित किया है जो अवंता पावर एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एपीआईएल) की अनुषंगी कंपनी है.  एपीआईएल की यह दूसरी परियोजना है. इससे पहले भेल ने एपीआईएल की छत्तीसगढ़ में रायपुर स्थित 600 मेगावाट क्षमता की परियोजना को टीपीपी ने चालू किया था. इसके अलावा मध्यप्रदेश के गाडरवारा में एनटीपीसी के लिए 800 मेगावाट की परियोजना भेल द्वारा क्रियान्वित की जा रही हैं. जिनमें दो सुपरक्रिटिकल इकाइयां है. यह 1964 में स्थापित की गयी और पूरी तरह से केंद्र सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी है.2013 में इसे महारत्न कंपनी का दर्जा प्रदान किया गया.

पश्चिम बंगाल का कूचबिहार जिला पहली बार मई 2016 में चर्चा में आया. पूर्वी हिमालय के निचले क्षेत्र में स्थित यह जिला उस समय चर्चा में रहा जब इस क्षेत्र के 51 एन्क्लेव को वर्ष 1947 में आज़ादी के बाद पहली बार मतदान करने का अधिकार दिया गया. इन एन्क्लेवों में रहने वाले 9000 लोग 5 मई 2016 को अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे. कूचबिहार के 51 जिलों को 31 जुलाई 2015 तक नो मैन्स लैंड के रूप में जाना जाता था. इससे पहले इस क्षेत्र पर न तो भारत और न ही बांग्लादेश का अधिकार था. परिणामस्वरूप इस क्षेत्र के नागरिकों को किसी एक देश के पूर्ण अधिकार प्राप्त नहीं थे. यह परिक्षेत्र 31 जुलाई 2015 को दोनों देशों के बीच औपचारिक रूप से भूमि सीमा समझौता-1974 लागू होने पर देश का भाग बन गये. इस दिन भारत एवं बांग्लादेश के 162 एन्क्लेव हस्तांतरित किये गये. इस समझौते के अनुसार, 51 बांग्लादेशी एन्क्लेव (7110 एकड़) भारत के कूचबिहार (बांग्लादेश) क्षेत्र में स्थित हैं जबकि भारत के 111 एन्क्लेव (17160 एकड़) बांग्लादेश की सीमा में हस्तांतरित किए गये. यह 51 एन्क्लेव दिनहाता, मेक्लिगंज, सिताई, सीतालकुची एवं तूफ़ानगंज विधानसभा क्षेत्रों में मौजूद हैं.

भारतीय नौसेना ने 1 मई 2016 को स्कॉर्पियन श्रेणी की पहली पनडुब्बी ‘कलवरी’ का सफल समुद्री परीक्षण किया. इस पनडुब्बी को मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड मुंबई (एमडीएल) में बनाया गया है एवं यह पूर्ण रूप से स्वदेश निर्मित पनडुब्बी है.अपनी पहली समुद्री परीक्षण के दौरान पनडुब्बी ‘कलवरी’ मुंबई तट से दूर अपनी संचालक शक्ति (प्रोपल्शन) के जरिए करीब 1000 घंटे तक समुद्र में तैरती रही. इस दौरान प्रोपल्शन प्रणाली, सहायक उपकरण एवं प्रणालियों, नेवीगेशन सहायता, संचार उपकरण और स्टीयरिंग गियर के कई प्रारंभिक परीक्षण किए गए. ‘कलवरी’ पनडुब्बियों के इस नए वर्ग के लिए विभिन्न मानक संचालन प्रक्रिया भी रक्षा मंत्रालय द्वारा मंजूर की गई हैं.

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारत सरकार का राष्ट्रीय कार्यक्रम- उन्नत ज्योति द्वारा सभी के लिए रियायती एईडी(उजाला) का 30 अप्रैल 2016 को एक समारोह के दौरान भोपाल में शुभारंभ किया.इस कार्यक्रम का क्रियान्वयन बिजली मंत्रालय की संयुक्त उपक्रम की पीएसयू कंपनी ऊर्जा दक्षता सेवाएं लिमिटेड (ईईएसएल) द्वारा किया जा रहा है.इस कार्यक्रम के तहत अगले छह माह में तीन करोड़ एलईडी बल्ब बांटे जाएंगे. मध्यप्रदेश के लोग 9 वॉट का बल्ब  85 रुपये में खरीद पाएंगे. एक साल के भीतर 9 करोड़ एईडी बल्ब बांटे गए हैं. इससे प्रत्येक साल उपभोक्ताओं को 5500 रुपए की बचत करने में मदद मिलेगी. उजाला न सिर्फ उपभोक्तातओं को बिजली बिल कम करने में मदद देगा बल्कि देश में ऊर्ज संरक्षण में भी योगदान करेगा. उजाला कार्यक्रम की निगरानी पारदर्शी तरीके से राष्ट्रीय स्तर पर हो  रहा है.

जापान ने भारतीय नौकरशाह से राजनेता बने एन के सिंह को 29 अप्रैल 2016 को देश दूसरे सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित करने का निर्णय लिया.जापानी प्रधानमंत्री शिंजो एबी 10 मई को उन्हें प्रतिष्ठित ‘द ऑर्डर ऑफ द राइजिंग सन, गोल्ड एंड सिल्वर’ प्रदान करेंगे.एनके सिंह को भारत-जापान आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने में अहम भूमिका निभाने के लिए चयनित किया गया.

वह मारुति-सुजुकी के भारत में निवेश करने के फैसले के वक्त जापान में अपनी सेवाएं दे रहे थे.उन्होंने कई अन्य ऑटोमोबाइल कंपनियों को भी भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया.राज्यसभा सदस्य रह चुके सिंह ने राजस्व सचिव और योजना आयोग के सदस्य के तौर पर अपनी सेवाएं दी हैं.वे देश के शीर्ष नौकरशाहों में से एक रहे और उन्होंने भारत के व्यय एवं राजस्व सचिव और योजना आयोग के सदस्य जैसे महत्वपूर्ण पद संभाले.

‘द ऑर्डर ऑफ द राइजिंग सन, गोल्ड एंड सिल्वर’ की स्थापना 1875 में की गई थी. वर्ष 1981 से गैर-जापानी लोगों को भी यह पुरस्कार दिया जाने लगा.