स्वदेश में निर्मित हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस को 1 जुलाई 2016 को भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया. HF-24 मारुत के बाद तेजस भारतीय वायुसेना में शामिल होने वाला दूसरा स्वदेशी लड़ाकू विमान है.1967 में वायुसेना में शामिल मारुत ने 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध में काफी ख्याति हासिल की थी.वायुसेना की 45वीं स्क्वाड्रन फ्लाइंग डैगर्स में दो तेजस विमानों को शामिल किया गया. दक्षिणी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन चीफ एयर मार्शल जसबीर वालिया की मौजूदगी में एयरक्राफ्ट सिस्टम टेस्टिंग एस्टेबलिशमेंट (एएसटीई) में एलसीए स्क्वाड्रन को शामिल किया गया.

इन विमानों का निर्माण बंगलूर स्थित एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के सहयोग से किया है. मार्च 2017 तक छह और तेजस मिलने की संभावना है जबकि दो वर्षों में 16 तेजस विमान वायुसेना में शामिल किये जाने की योजना बनाई गयी है.

तेजस ने अपनी निर्माण एवं विकास प्रक्रिया के दौरान ढाई हजार घंटे का सफर तय किया जिसमें इस विमान ने तीन हज़ार बार सफलतापूर्वक उड़ान भरी. तेजस ने पहली उड़ान 4 जनवरी 2001 को भरी थी इसके बाद अब तक यह कुल 3184 बार सफल उड़ान भर चुका है. 3100 से ज्यादा परीक्षण उड़ानों में एक बार भी दुर्घटनाग्रस्त नहीं होना तेजस की सर्वाधिक महत्वपूर्ण उपलब्धि है

तेजस की विशेषताएं

यह हल्का लड़ाकू विमान है जो 50 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है.

•  इसका वजन 6560 किलोग्राम है तथा इसके पंखों की चौड़ाई 8.20 मीटर है. इसकी लम्बाई 3.20 मीटर और ऊंचाई 4.40 मीटर है.

•  तेजस हवा से हवा में मार करने वाली डर्बी मिसाइलों और जमीन पर स्थित निशाने के लिए आधुनिक लेजर डेजिग्नेटर और टारगेटिंग पॉड्स से लैस है.

•   इसमें सेंसर तरंग रडार लगाया गया है जो दुश्मन के विमान या जमीन से हवा में दागी गई मिसाइल के तेजस के पास आने की सूचना देता है.

•  स्वदेश निर्मित तेजस भारतीय वायुसेना को पुराने पड़ चुके मिग-21 विमानों का विकल्प उपलब्ध कराएगा.

•   विमान का ढांचा कार्बन फाइबर से निर्मित है  जो धातु की तुलना में कहीं ज्यादा हल्का और मजबूत है.