हिन्दी भाषा और साहित्य का अध्ययन कई प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आवश्यक है. संघ लोक सेवा आयोग के अतिरिक्त कई राज्य लोक सेवा आयोग की प्रतियोगिताओं में हिन्दी का एक अनिवार्य प्रश्नपत्र होता है. लोक सेवा आयोग की प्रतियोगिताओं में हिन्दी साहित्य वैकल्पिक विषय के रूप में भी लोकप्रिय रहा है. इसके कई कारण हैं:
कम समय में तैयारी : हिंदी साहित्य की तैयारी ढाई से तीन महीनों में अच्छी तरह हो जाती है . विषय छोटा होने के कारण पुनरावृत्ति भी आसान होती है.
अध्ययन की पृष्ठभूमि होना ज़रूरी नहीं : हिंदी साहित्य से सफल ज़्यादातर अभ्यर्थियों ने अपने स्नातक विषय के रूप में इसे नहीं पढ़ा ,लेकिन सहज और सरल होने के कारण इसे समझने में कोई कठिनाई नहीं हुई .
हाई स्कोरिंग : हिंदी माध्यम से सर्वोच्च स्थान  प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों में से बड़ी संख्या हिंदी साहित्य के अभ्यर्थियों की रही है. कारण इसका हाई स्कोरिंग होना है. तीन महीने की तैयारी से ही 60-70% तक अंक प्राप्त किये जा सकते हैं.
राज्य सेवाओं में भी लोकप्रिय : हिंदी साहित्य उत्तर प्रदेश ,राजस्थान और बिहार जैसे राज्यों की राज्यस्तरीय परीक्षाओं में भी काफी लोकप्रिय है.
बार बार नए नोट्स की ज़रुरत नहीं : अन्य विषयों के विपरीत हिंदी साहित्य की तैयारी को बार बार अपडेट करने की ज़रुरत नहीं पड़ती . एक बार बनाए गए नोट्स अगले साल भी बिना किसी परिवर्तन के इस्तेमाल किये जा सकते हैं.
निबंध और साक्षात्कार में लाभ : साहित्य विद्यार्थियों में एक निश्चित दृष्टिकोण विकसित करता है ,जिसका लाभ निबंध और साक्षात्कार में मिलता है .

विभिन्न परीक्षाओं में हिन्दी व्याकरण से संबंधित प्रश्न भी पूछे जाते हैं. इसके अतिरिक्त गैर हिन्दी भाषियों के लिए भी राजभाषा हिन्दी का आधारभूत ज्ञान आवश्यक है. कास अकादमी हिन्दी भाषा और साहित्य से संबंधित सभी कोर्स उपलब्ध कराती है.