महाभोज : एक खतरनाक सम्मोहन भरी दुर्निवार अग्निलीक …

स्वतंत्रता के पश्चात राजनीति को आधार बनाकर लिखे गये उपन्यासों में मैला आंचल, रागदरबारी और महाभोज सर्वाधिक उल्लेखनीय हैं। मन्नू भण्डारी का महाभोज, प्रेमचन्द का ‘गोदान’ और फणीश्वरनाथ रेणु का ‘मैला आंचल’ तीनों ही मोहभंग जनित परिस्थितियों की उपज हैं। प्रेमचन्द के मोहभंग का कारण तत्कालीन स्वाधीनता आन्द...Read More

मैला आँचल : गोदान का तार्किक विस्तार

प्रेमचन्द के बाद हिन्दी में ग्राम कथा पर आधारित धारा अवरूद्ध सी हो जाती है। बलचनमा (नागार्जुन.1952) और गंगा मैया (भैरव प्रसाद गुप्त.1952) जैसे उपन्यास लिखे तो गये, परन्तु प्रेमचन्द जैसी व्यापक संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टि के अभाव में यथोचित प्रभाव नहीं छोड़ पाए। ऐसे में 1954 में मैला आंचल का आन...Read More

मैला आँचल : अभिनव शिल्प प्रयोग

1954 में मैला आंचल के प्रकाशन को हिन्दी उपन्यास की अद्भुत घटना के रूप में माना जाता है। इसने आंचलिक उपन्यास के रूप में न सिर्फ हिन्दी उपन्यास की एक नयी धारा को जन्म दिया, बल्कि आलोचकों को लम्बे समय तक इस पर वाद-विवाद का मौका भी दिया। अंग्रेजी में चौसर के ‘केन्टरवरी टेल्स’ और अमे...Read More

पाठ्यक्रम में शामिल ऑनलाइन उपलब्ध पुस्तकें

उपन्यास  गोदान नाटक भारत दुर्दशा  आषाढ़ का एक दिन  काव्य  कबीर ग्रंथावली  रामचरित मानस (सुन्दर काण्ड )Read More

हिंदी साहित्य : पाठ्यक्रम

मुख्य परीक्षा में हिंदी वैकल्पिक विषय के 250 अंकों के दो पत्र (कुल 500 अंक )हैं | पहला पत्र हिंदी भाषा और साहित्य के इतिहास पर केन्द्रित है | दूसरे पत्र में हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं की कृतियों के आस्वादन और उनपर केन्द्रित सवाल पूछे जायेंगे | हिंदी प्रश्नपत्र 1 (उत्तर हिंदी में लिखने होंगे ) ख...Read More