रेलवे ने ट्रेनों को टकराने से रोकने की प्रणाली (टीसीएएस) विकसित की है. 28 जुलाई 2016 को सिकंदराबाद मंडल के 250 किलोमीटर लंबे लिंगमपल्ली-बिडार खंड रेल मार्ग पर इस प्रणाली का परीक्षण किया गया.

  • प्रणाली के माध्यम से ट्रेन के इंजन के भीतर चालक को चेतावनी मिल जाएगी.

  • रेल मंत्रालय के अनुसार रिसर्च डिजाइंस एंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन (आरडीएसओ) ने  भारतीय विक्रेताओं के सहयोग से इसे देश में ही विकसित किया है.

  • इसका उद्देश्य सिग्नल को नजरअंदाज करने वाले चालक की गलती के कारण या अत्यधिक रफ्तार के कारण होने वाले ट्रेन हादसों को रोकना है.

  • इसके अलावा यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम टेक्नोलॉजी पर आधारित ट्रेन प्रोटेक्शन एंड वार्निंग सिस्टम (टीपीएसडब्ल्यू) का भी कुछ खंडों पर परीक्षण किया गया.

टीपीडब्ल्यूएस का प्रयोग-

  • 50 किलोमीटर लंबे चेन्नई-गुम्मीदिपुंडी उपनगरीय खंड और 200 किलोमीटर लंबे निजामुद्दीन-आगरा खंड पर टीपीडब्ल्यूएस का परीक्षण किया जा रहा है.

  • दिल्ली-आगरा खंड पर 160 किलोमीटर की अधिकतम रफ्तार से चलने वाली गतिमान एक्सप्रेस में टीपीडब्ल्यूएस लगाया गया है.

  • कोलकाता मेट्रो का 25 किलोमीटर लंबा दम दम-कावी सुभाष खंड भी टीपीडब्ल्यूएस से लैस है.

  • सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु लोको पायलट को सतर्क करने के लिए सभी इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव विजिलेंस कंट्रोल डिवाइस (वीसीडी) से लैस हैं.

 

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